यद्यपि विषय पर मत वैभिन्य हो सकता है आधुनिकता के अपने अपने मापदंड हो सकते है मैं भी कोई पुरातनपंथी नही हूँ किन्तु कुछ घटनाए ऎसी हो जाती है जो सोचने कों विवश करती है
एक दिन ऐसा वाकया हुआ कि मैं अपने मित्र के साथ ऑटो से कहीं जा रहा था मेरे मित्र जो पेशे से वकील है तथा काफी दुबले पतले जीरो
साइज के है वह पीछे बैठे हुए थे मैं उनके सामने वाली सीट पर बैठा गुफ्तगू कर रहा था तब तक एक अधेड़ महिला जो स्वयं तो सलवार समीज में थी अपनी किशोर वय की कन्या के साथ बैठ गयी ऑटो में बैठते ही उन्होंने वकील साहब कों एक गंभीर किस्म का धक्का दिया जिससे वकील साहब का कृशकाय शरीर लैपटॉप से नोट बुक टाइप में बदल गया तथा वे अपनी इज्जत बचाते हुए ऑटो के किनारे दुबक कर रह गए
कुछ देर के बाद पुनः महिला ने दीर्घ स्वास ले कर एक हलका सा धक्का इस अंदाज में दिया मानो उसको बैठने में परेशानी हो रही है तथा कहा कि और खिसकिये इस पर बेचारे वकील साहब ने मिमियाते हुए कहा कि अब कितना पतला हो जाऊं दीवार से सटा हुआ हू आप कहे तो उतर जाऊं इस पर उस महोदया ने अंग्रेजी में गाली देते हुए कहा कि ना जाने कैसे कैसे लोग ऑटो में बैठ जाते है सिविक सेन्स नहीं है इन अनकल्चर्ड लोगो कों अभी मैं कुछ समझ ही पाता तब तक वकील साहब ने कहा कि मैडम कल्चर की बात ना करे तो अच्छा है यदि सार्वजनिक वाहनों से इतनी ही एलर्जी है तो ऑटो रिजर्व कर लेना चाहिए था ताकि अनकल्चर्ड लोगो से पाला ना पड़ता इस पर वे महिला ऑटो वाले कों बुरा भला कहते हुए कि कैसी जाहिल गंवार लोगो कों बैठा लेते हो रोको मुझे उतरना है
ऑटो वाला जब तक रोकता तब तक वकील साहिब भी आपे से बाहर हो चुके थे उनका पतला शरीर नाग के समान बल खा रहा था उन्होंने ऑटो वाले से कहा कि उतार दो मैं यह दोनों सीट रिजर्व कर लेता हूँ तुम्हे पैसे मिल जायेंगे अगले मोड़ पर वकील साहिब ने कह दिया कि मैडम आप का क्या कल्चर है वह आपके और आपकी कन्या के परिधानों से साफ़ झलक रहा है यदि बाहर आपका यह पहनावा और यह कल्चर दिख रहा है तो आपके परिवार का क्या संस्कार होगा सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है वकील साहब के इस तर्क से महिला पर तो कोई ख़ास प्रतिक्रिया नही हुई लेकी वह आधुनिका कन्या का चेहरा शर्म से लाल हुआ
दर असल जब वे दोनों भद्र स्त्रिया ऑटो से उतरी तो लड़की जो तंग जींस व टी शर्ट में थी शर्ट जो कुछ कुछ आधी सी थी तथा नाभि कों ढकने का प्रयास कर रही थी उस शर्ट पर एक स्लोगन लिखा था
virginity is not a dignity it is just a lack of opportunity
पहले तो मैंने इस पर ध्यान नही दिया केकिन बाद में घर आकर मैंने अपनी आधुनिका रिश्तेदार से इस सारी घटना की चर्चा करते हुए शर्ट पर लिखे आप्त वाक्य और उसके खरीदने वाले पिता माता या स्वयं उस लड़की की भर्त्सना करता उससे पहले ही उन्होंने मुझे यह कह कर चुप करा दिया कि बड़े किस्मत वाले हो तुम्हारे कोई लड़की नही है अन्यथा तुम ऎसी बात की चर्चा नही करते चुप चाप देख कर भी अनदेखा कर देते उनके इस उत्तर से हतप्रभ हो कर मैं उस दिन से यही सोच रहा हू कि क्या खुशबू जैसे लोग घर घर में नही है तब उसके एक बयान पर इतना बवाल क्यों ?
क्या लड़की के अभिभावक इतने निरीह हो गए है कि वे आधुनिकता के नाम पर ऐसे स्लोगन वाले वस्त्र खरीद कर पहनाते है क्या हमारी संस्कृति व मानसिकता में इतना परिवर्तन आ चुका है यदि वास्तव में ऐसा ही है तो वाकई मैं भाग्यशाली हू कि मेरी कोई लड़की नही है जैसा कि मेरी महिला रिश्तेदार ने मुझे बताया था
आप भी क्या ऐसा ही सोचते है वैसे मैं एक बात स्पष्ट करता दू कि मैं नारी समानता और स्वतंत्रता का समर्थक हू पर........
क्या आधुनिकता ने हमें इस कदर गुलाम बना रखा है