शुक्रवार, 27 जून 2008

उपलब्धि

चेचक परविजय के बीस वर्षपूरे हुए ।यह समाचार आया है। कि इस बीच---आतंकवाद और उग्रवाद नेप्रतिवर्षहजारों कोजीवन-बंधन से मुक्त कराया है। हम प्रगति पर हैं॥ । अब इन्सानकीड़े-मकोड़ों के हाथों नहीं मारा इन्सानइन्सान के हाथ मरने का गौरव पाता है।

3 टिप्‍पणियां:

arvind mishra ने कहा…

अब जब इतने दिन बाद टिपिया ही रहे थे तो दो चार लफ्ज औरो लिख देते ...मगर जितना लिखा अछा लिखा अपनी बतिया तो आप ने जोरदार तरीके से कहिई डाली है ...

note pad ने कहा…

kyakahun kaun sunega
kyakahun maya ke aage -
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कहिये , कहिये , हम सुन रहे हैं ......
और यह माया कौन है जो आपको पीछे धकेले हुए है ?
अपना ब्लॉग ब्लॉगवानी डॉट कॉम पर रजिस्टर कराएँ तो सुनने वाले बहुतेरे मिल जाएंगे ।

CHOKHER BALI
sandoftheeye.blogspot.com
और टिप्पणी मॉडरेशन हटा सकें तो टिप्पणी करने वालों का कुछ भला हो जाएगा :)

Smart Indian ने कहा…

bilkul sahee kahaa aapne.