मंगलवार, 20 जनवरी 2009

ओबामा केवल रंग बदला है दिल थोड़े !!!


ओबामा ओबामा का शोर सुनकर व कुछ पाश्चात्य मुखी भद्रजन ऐसे प्रसन्न हो रहे हैं जैसे कोई नए इसा मसीह का उदय हो गया है इसके पूर्व भी कई राष्ट्रपतियों की ताजपोशी के बारे में पढ़ा गया है लेकिन जैसा शोर शराबा इन दिनों दुनिया में व भारत में हो रहा है उसका कारण सिवाय राष्ट्रपति के काले रंग के और नजर नहीं आता
वैश्विक मंदी व अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त होने पर न तो ओबामा के पास कोई अलादीन का चिराग है न ही रूजवेल्ट जैसी कोई न्यू डील की पॉलिसी ही तो इतना इतराने की क्या जरूरत है
जिनके भाषण प्रभावशाली हो उनकी नीतियाँ भी उसी प्रकार की लोकप्रिय हों यह तो भारतीय नेतृत्व के शिखर पुरुषों के उदाहरणों से सिखा जा सकता है हमने ऐसे मृदुभाषी व जोशीले भाषणों का बाद में उल्टा असर यही देखा है की हम जब उनको याद करते हैं तो कहते है की फलां नेता जी का भाषण सुनने इतने लोग इकठे हुए बाद में उन्होंने क्या किया यह किसी को याद नही चाहे वो सत्ता पक्ष में रहे हों चाहे विपक्ष में
माना कि ओबामा बिना जातीय समीकरण के बिना आरक्षण के लाभ के, बिना यह घोषणा किए कि व दलित व शोषित समाज के हैं , सहानुभूति बटोरे बगैर सर्वोच्च पद पर पहुँच गए हैं
लेकिन भारत व एशिया के मामलों में ओबामा कि कोई चेंज कि पालिसी होगी ऐसा मुझे नहीं लगता
विश्वास न हो तो कुछ दिनों के बाद वो इराक का दौरा कर ले वहां फूलो कि वर्षा नहीं होने वाली
पाकिस्तान के प्रति नीतियों में कोई बदलाव के आसार नजर नहीं आते
काले रंग कि कोंडालीजा राईस हो चाहे गोरी सुघड़ देहयष्टि की धनी हिलेरी क्लिंटन मुझे तो दोनों के बयानों में कोई चेंज (परिवर्तन ) नहीं दिख रहा तो किस बात का चेंज
अमेरिकी बन्दर चाहे काला हो या लाल (सफ़ेद) घुड़की दोनों देते है भारतीय हितों का नुकसान दोनों करते हैं अतः ज्यादा इतराने की जरूरत नहीं
हमारे प्रणव बाबू को ऐसे ही चिल्ला चिल्ला कर पकिस्तान को कोसना पड़ेगा फ़िर क्लिंटन से बात कर चुप होना पड़ेगा
ओबामा हो या ओसामा किसी की प्रशस्ति गान से बात नही बनने वाली अतः हे संकर प्रजाति के नेता उठो व कुछ करो देश के लोग तुम्हे देख रहे हैं ओबामा व मिशेल को नहीं

2 टिप्‍पणियां:

आदर्श राठौर ने कहा…

बहुत सही कहा है प्रभु

Arvind Mishra ने कहा…

बेलौस बोले हैं आप !