रविवार, 3 जुलाई 2011

आज के पुष्प की अभिलाषा


माखन लाल चतुर्वेदी की प्रसिद्द रचना पुष्प की अभिलाषा कों आज के सन्दर्भ में एक स्थान पर कुछ ऐसे लिखा पाया

चाह नही मैं मनमोहन की माला में गुथा जाऊ
चाह
नहीं राहुल बाबा की वरमाला में गुथा जाऊ
चाह
नही मैं अन्ना के सर चढ़ मैं सत्ता से बतियाऊ
चाह
नहीं मैं रामदेव के संग पुलिस की लाठी खाऊ

मुझे
तोड लेना दिग्गी तुम उस दफ्तर में देना फेक
बिना
वजन फ़ाइल सरका दे जिसके अफसर बाबू नेक

7 टिप्‍पणियां:

Mired Mirage ने कहा…

किन्तु कोई पुष्प दिग्गी के हाथ क्यों छुआ जाना चाहेगा? शेष अभिलाषाएँ समझ आती हैं।
घुघूती बासूती

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

सटीक लिखा पाया
मन भाया।

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

मैने अपने पिछले पोस्ट में, आपके प्रश्न के उत्तर में एक कविता पोस्ट की थी। लगता है आपने देखा नहीं। कृपया पढ़ने के बाद इस कमेंट को मिटा दें।

Er. Shilpa Mehta ने कहा…

अभिलाषाएं तो बढ़िया हैं - परन्तु दिग्गीजी के हाथों ????

राजेंद्र गुप्ता Rajendra Gupta ने कहा…

एकदम सटीक, किन्तु हाँ बनमाली की जगह डिग्गी राजा तो खटक रहें हैं। गूगल+ और फेसबुक पर शेयर कर रहा हूँ।

Arvind Mishra ने कहा…

बलि बलि जाऊं इस अभिलाषा पर मगर शिल्पा जी ने सही टोका है !

Kishan Singh Rathore ने कहा…

kabhi acha likhte ho aap sirf ye bata do ki aap ne ye font konsa istemal kiya hai .